शेयर बाजार में वॉल्यूम (volume )क्या होता है?|what is volume in share market


आज हम इस लेख के जरिए वॉल्यूम के बारे में जानेंगे शेयर बाजार में वॉल्यूम क्या होता है(what is volume in stock market ), टेक्निक एनालिसिस वॉल्यूम क्या होता है,( what is volume in technical analysis) वॉल्यूम किसी भी स्टॉक में होने वाली खरीदी और बिक्री की मात्रा कुल संख्या वॉल्यूम से होता है

Table of Contents

Definition of Volume

किसी निश्चित Time period के दौरान जितने शेयर्स को Buy और Sell किया जाता है उन सभी शेयर्स को गिनने पर जो कुल संख्या आती है उसे वॉल्यूम (Volume) या “ट्रेडिंग वॉल्यूम” कहा जाता है।

सौदे में Volume का प्रैक्टिकल इस्तेमाल

सौदे में VOLUME का प्रैक्टिकल इस्तेमाल
ध्यान देने वाली बात है कि जब भी आप किसी स्टॉक के volume और उसके प्राइस को एक साथ मिलाकर देखेंगे तो आपको बहुत कुछ समझ आएगा,

volume और price मिलकर वास्तव में मजबूत ट्रेंड बनाते है,

Volume + Price = Trend (Strong)

वॉल्यूम और price के इस सम्बन्ध को ध्यान में रखते हुए मार्केट में अपनी पोजीशन को सेट कर सकते है-

वॉल्यूम कितने समय के लिए ट्रेड किया जाता है?

वॉल्यूम कितने समय के लिए ट्रेड किया जाता है?
Stock market me volume ka matlab kya hota hai–किसी भी एक Time frame के दौरान चाहे वह 1 दिन हो, 30 दिन हो, 1 महीना हो या 1 साल हो मतलब एक निश्चित समय के दौरान चाहे वह 1 मिनट हो या 1 घंटा उसमें किसी कम्पनी के जितने “number of shares” को ट्रेड किया जाता है उसे हम वॉल्यूम बोलते हैं।

वॉल्यूम को कहां पर दिखाया जाता है?

वॉल्यूम को कहां पर दिखाया जाता है?
शेयर मार्केट में जो स्टॉक एक्सचेंज होते हैं वह प्रत्येक ट्रेडिंग session के दौरान “ट्रेडिंग वॉल्यूम” को पब्लिश करते है।

स्टॉक एक्सचेंज पर जो वॉल्यूम दिखाया जाता है वह उन सभी स्टॉक्स का मिलाकर Total Volume दिखाया जाता है जो उस stock exchange पर ट्रेड किये गए हों ना कि किसी एक Individual stock का।

सभी स्टॉक एक्सचेंज हर स्टॉक्स के वॉल्यूम को ट्रैक करते रहते हैं इसलिए हर शेयर का वॉल्यूम उनके पास available होता है।

आप उस वॉल्यूम को stock exchange, न्यूज़ वेबसाइट और बहुत सारी थर्ड पार्टी वेबसाइट है जिन पर जाकर देख सकते हैं।

आप चाहें तो किसी भी ब्रोकर प्लेटफार्म पर जाकर भी वॉल्यूम को चेक कर सकते हैं।

अधिकतर जो numbers या indicators होते हैं जो volume data को दिखाते हैं वो ऑनलाइन चार्ट्स के द्वारा दिखाते हैं।

समय-समय पर वॉल्यूम के चार्ट को देखने पर हमें मार्केट के rise और decline का पता चलता रहता है।

शेयर के प्राइस पर वॉल्यूम का क्या प्रभाव पड़ता है?

शेयर के प्राइस पर वॉल्यूम का क्या प्रभाव पड़ता है?
किसी भी शेयर के प्राइस पर वॉल्यूम का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। volume के ऊपर नीचे होने पर शेयर का प्राइस में भी काफी movement या उतार चढ़ाव आता है।

जब High वॉल्यूम ट्रेड (Buy और sell) होता है तो शेयर के प्राइस में लिक्विडिटी बढ़ जाती है और जब वॉल्यूम काफी Low होता है तो लिक्विडिटी भी कम होती है।

मतलब स्टॉक को खरीदने और बेचने वालों की संख्या कम होती है।

Trading Volume के द्वारा हमें मार्केट के trend का पता चलता है जब मार्केट rise होता है तो वॉल्यूम धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और प्राइस भी बढ़ जाता है।

और जब मार्केट डाउन होता है तो Volume के साथ-साथ शेयर प्राइस भी डाउन हो जाता है।

अगर देखा जाए तो वॉल्यूम market strength (मंदी और तेजी) को दर्शाता है।

आइए इसे एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं:

जब स्टॉक का वॉल्यूम बढ़ रहा हो लेकिन उसका शेयर प्राइस गिरने लगता है तो समझ लीजिए कि शेयर बाजार में ट्रेंड नीचे की तरफ (downtrend) जा रहा है।
जब स्टॉक का वॉल्यूम बढ़ रहा हो और साथ ही उसका शेयर प्राइस भी बढ़ता है तो समझ जाना कि शेयर बाजार में ट्रेंड ऊपर की तरफ (uptrend) जा रहा है

ट्रेडिंग वॉल्यूम क्यों महत्वपूर्ण है?

ट्रेडिंग वॉल्यूम क्यों महत्वपूर्ण है?
इंट्राडे ट्रेडिंग में किसी भी ट्रेडिंग session के दौरान जब Market open होता है तब volume “High” होता है और जब Market close होता है तो भी वॉल्यूम “High” होता है क्योंकि उस समय Traders को अपनी position को end करना पड़ता है।

इसलिए इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम एक बहुत ही महत्वपूर्ण मैट्रिक है।

जो इन्वेस्टर्स Fundamental analysis करते हैं उनके लिए भी वॉल्यूम बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है

क्योंकि ट्रेडिंग वॉल्यूम को देखकर निवेशक पता लगा पाते हैं कि कोई स्टॉक Long period में कितना ज्यादा खरीदा और बेचा जाता है।

इससे investors को स्टॉक्स के price movement के बारे में पता चलता है।
Technical analysis करने में वॉल्यूम की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ट्रेडिंग वॉल्यूम investors और ट्रेडर्स दोनों के लिए ही बहुत महत्वपूर्ण है। जो बड़े और Long term investors होते हैं।

जैसे; Institutional investors और म्यूच्यूअल फंड कंपनीस तो ये higher volume वाले स्टॉक्स ही खरीदना पसंद करते हैं।

वॉल्यूम का घटना (Volume Increase) या वॉल्यूम का बढ़ना (Volume Decrease)

हम कैसे जान सकते हैं की वॉल्यूम घट रहा है या बढ़ रहा है इसलिए आमतौर पर कुछ नियम हैं जिनसे पता चलता है की वॉल्यूम घट रहा है या बढ़ रहा है किसी स्टॉक के वॉल्यूम कम पढ़े हुए माने जाएंगे या कब घटे हुए माने जाएंगे

वॉल्यूम का घटना (VOLUME INCREASE) या वॉल्यूम का बढ़ना (VOLUME DECREASE)
वॉल्यूम के सम्बन्ध में एक और महत्वपूर्ण बात ये है कि –

हम कैसे जानेंगे कि volume घट रहा है या बढ़ रहा है, या volume बराबर है ?

तो इसके लिए आम तौर पर ये नियम है, जिस से हमें पता चलता है कि स्टॉक के volume कब बढ़ हुए माने जायेंगे और कब घटे हुए माने जायेंगे –

वॉल्यूम का घटना (Volume Decrease)
किसी स्टॉक के volume कम हो रहा है, ये तब माना जायेगा जब उस स्टॉक के आज के ट्रेड का वॉल्यूम , पिछले दस दिनों के Volume Average से कम हो,

वॉल्यूम का बढ़ना (Volume Increase)
किसी स्टॉक के volume ज्यादा हो रहा है, ये तब माना जायेगा जब उस स्टॉक के आज के ट्रेड का वॉल्यूम , पिछले दस दिनों के Volume Average से ज्यादा हो,

वॉल्यूम का बराबर होना (No Change in Volume )
किसी स्टॉक के volume तब बराबर माना जायेगा जब उस स्टॉक के आज के ट्रेड का वॉल्यूम , पिछले दस दिनों के Volume Average के बराबर होता है,

शेयर के अलावा वॉल्यूम किसके लिए मापा जाता है?

शेयर के अलावा वॉल्यूम किसके लिए मापा जाता है?
ट्रेडिंग वॉल्यूम केवल stocks के लिए ही नहीं बल्कि अन्य Financial instrument के लिए मापा जाता है जैसे; Bonds, derivatives (Futures and Options contract), हर तरह की commodities और Gold.

जिस तरह से स्टॉक्स के लिए वॉल्यूम मतलब number of shares होता है जो एक निश्चित समय अवधि में ट्रेड किए जाते हैं।

ठीक उसी तरह फ्यूचर्स और ऑप्शन्स में वॉल्यूम को इस तरह देखा जाता है कि कितने लोगों ने contracts को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित किया।

इसके अलावा वॉल्यूम को indices (इंडेक्स) के लिए भी मापा जाता है मतलब आप उन सभी स्टॉक्स का वॉल्यूम भी पता कर सकते हैं जो निफ्टी 50 या सेंसेक्स पर ट्रेड हो रहे हो।

क्योंकि निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही Indices या Index हैं।

चार्ट्स पर वॉल्यूम कहां दिखता है?

चार्ट्स पर वॉल्यूम कहां दिखता है?
हम किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग डे के दौरान जो चार्ट देखते हैं

शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है, What is volume in stock market in hindi, volume ka matlab kya hai share market me,
लाल और हरी sticks वॉल्यूम को दर्शाती हैं।
उस पर हमें प्राइस चार्ट के नीचे की तरफ जो vertical मतलब सीधी खड़ी लाइन्स (bar) दिखाई देती हैं वो वास्तव में वॉल्यूम को दर्शाती हैं।

जो ये vertical लाइन्स होती हैं वो या तो Green होती है या फिर Red.

Green Net buying volume को दिखाता है जबकि Red Net selling volume को दर्शाता है.

जिस समय पर वॉल्यूम ज्यादा होता है वहां की लाइन ज्यादा लंबी होती है और जहां वॉल्यूम कम होता है वहाँ लाइन छोटी होती

स्टॉक मार्केट में स्टॉक का Volume कैसे बनता है

स्टॉक मार्केट में तो का वॉल्यूम उस स्टॉक में बेचे गए और खरीदे गए शेयर की कुल मात्रा से बनता है कर किसी ए कंपनी के 100000 शेयर बेचे जाते हैं तो उसके कंपनी का 100000 शेयर ही खरीदे जाएंगे क्योंकि वह एक बात शेयर उस बचे हुए शेयर होल्डर से खरीदने वाले शेरहोल्डर को ट्रांसफर कर दिए जाते हैं और इस प्रकार उस दिन का ट्रेड वजन ट्रेड वॉल्यूम 1 लाख एक लाख की होगा क्योंकि जितने एयर बेचे गए उतने ही किसी अन्य ने वह शेयर खरीद लिए और वह शेर उसे ट्रांसफर हो गए उसी को ही वॉल्यूम कहा जाता है

शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या होता है?

शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या है?
वॉल्यूम एक ऐसा टूल है जो यह बताता है कि एक निश्चित टाइम पीरियड में कितने शेयर को खरीदा और बेचा गया है।

यह ट्रेंड और पैटर्न की एनालिसिस करने में मदद करता है।

आप चाहे किसी एक व्यक्ति के स्टॉक की बात करें या ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट की संख्या या फिर पूरे स्टॉक मार्केट के बारे में, वॉल्यूम की जानकारी आपको सभी जगह मिलेगी।

लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि बहुत ही कम ट्रेडर या निवेशक होते है जो इस जानकारी को अधिक प्रॉफिट और कम जोखिम के लिए इस्तेमाल करते हैं।

वॉल्यूम एक स्टॉक में निवेशक की रुचि के बारे में जानकारी देता है।

मार्केट में एक खरीददार को ट्रेड पूरा करने के लिए एक विक्रेता की जरुरत होती है।

शेयर मार्केट में वॉल्यूम के प्रकार

दो प्रकार के वॉल्यूम होते हैं

डिलिवरी वॉल्यूम – डिलीवरी वॉल्यूम वे शेयर होते हैं जो एक डीमैट खाते से दूसरे में ट्रांसफर होते हैं और उन्हें एक दिन के अंदर स्क्वायर ऑफ नहीं किया जाता है।

ट्रेडेड वॉल्यूम- ट्रेडेड वॉल्यूम दिन में कारोबार करने वाले शेयरों की कुल संख्या है।

वॉल्यूम बाजार में स्टॉक के लिए सप्लाई और डिमांड को दर्शाता है।

कम वॉल्यूम वाले स्टॉक को Illiquid कहा जाता है।

जब वॉल्यूम कम होती है, तो खरीदार क्या भुगतान करने के लिए तैयार हैं और विक्रेता क्या (बिड-आस्क प्राइस) लेने के लिए कह रहे हैं, के बीच स्प्रेड बढ़ेगा, जिससे एक सफल ट्रेड करना मुश्किल हो जाता है।

नतीजतन, कम बिड प्राइस को स्वीकार किए बिना एक इल्लिक्विड स्टॉक को जल्दी से बेचना मुश्किल या असंभव हो सकता है।

इसके अलावा, क्योंकि स्प्रेड बड़ा है, ट्रेड करते समय किसी भी दिशा में इल्लिक्विड स्टॉक में बड़े स्तर पर उतार-चढ़ाव देखे जाते हैं।

इसलिए शेयर बाजार में कम वॉल्यूम के साथ कम इल्लिक्विड वाले शेयरों से बचें।

डिलीवरी वॉल्यूम क्या है?

डिलीवरी वॉल्यूम किसी विशिष्ट शेयर्स की संख्या है जो वास्तव में एक सेट से लोगों के पास जाते हैं, जिनके पास आज से पहले उनके डीमैट खाते में शेयर थे और आज उन लोगों के दूसरे सेट को बेच रहे हैं, जिन्होंने उन शेयरों को खरीदा है और उन शेयरों को T + 2 दिन बाद क्रेडिट किया जाता है

Technical Analysis में Volume का महत्व

Volume का महत्त्व Technical Analysis में इसलिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है क्योकि वॉल्यूम की हेल्प से हमें इन प्रमुख बातो का पता चलता है

Stock Insights : किसी स्टॉक के ऊपर लोगो का कितना झुकाव है, लोग किस स्टॉक में कितना ट्रेड ले रहे है, ये बात किसी स्टॉक के trade volume को देख कर आसानी से लगाया जाना जा सकता है,
Technical Pattern and Trend Confirmation: – Technical Analysis में volume को इसलिए और खास महत्व दिया जाता है क्योकि किसी स्टॉक में ट्रेड वॉल्यूम को देख कर इस बात का आसानी से पता लगाया जा सकता है, उस स्टॉक का ट्रेंड कितना मजबूत (Strong) या कमजोर (Weak) है, इसके आलावा Technical Analysis में प्रयोग किये जाने वाले सभी tools, द्वारा जो भी signal निकाला जाता है, वास्तव में वो signal कितना स्ट्रोंग है या कितना weak है इस बात का पता भी volume से ही चलता है,
स्टॉक में तेजी या मंदी के समय (Time Frame ) का वास्तविक सूचक – Technical Analysis में volume को इसलिए और खास महत्व दिया जाता है क्योकि किसी स्टॉक में ट्रेड वॉल्यूम को देख कर इस बात का आसानी से पता लगाया जा सकता है, कि किसी स्टॉक में होने वाले ट्रेड में कौन से समय में लोग सबसे ज्यादा खरीदी कर रहे है, या कौन से समय के बीच स्टॉक की विक्री ज्यादा हो रही है,
Stock के Active या Not Active का सूचक – Technical Analysis के अन्दर इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि सौदे लेते समय इस बात को चेक किया जाता है, जिस कंपनी के स्टॉक पर दाव लगाया जा रहा है, उसमे पर्याप्त volume है या नहीं, यानि वो share सौदे के नजर से अच्छी तरह से active है या नहीं,
कही ऐसा तो नहीं लोग उस शेयर को बहुत कम मात्रा में खरीद और बेच रहे है, लोग कितनी मात्रा में खरीद या बेच रहे है,इस बात का पता सिर्फ स्टॉक के trade volume को देख कर ही लगाया जा सकता है,

ध्यान देने वाली बात ये है कि – जिस स्टॉक में सबसे ज्यादा लोग ट्रेड लेते है, यानि जिस स्टॉक के ट्रेड का volume ज्यादा होता है, उसे उतना ज्यादा active शेयर माना जाता है,

वॉल्यूम के द्वारा मार्केट ऊपर नीचे कैसे होता है?

वॉल्यूम के द्वारा मार्केट ऊपर नीचे कैसे होता है?
जब शेयर के प्राइस में बहुत ज्यादा गिरावट आ जाती है तो ट्रेडर्स उसे खरीदने लगते हैं जिससे वॉल्यूम बढ़ने लगता है और फिर धीरे-धीरे शेयर की कीमतें भी बढ़ने लगती हैं।

इसके बाद वॉल्यूम दोबारा एक कदम पीछे हो जाता है मतलब थोड़ा सा कम हो जाता है इसी तरह से प्राइस घटता है या बढ़ता है तो वॉल्यूम एक कदम पीछे या आगे कर लेता है।

जब वॉल्यूम पहले एक कदम पीछे करने के मुकाबले जब दूसरी बार एक कदम पीछे जाता है तो अगर वह पिछली बार से नीचे नहीं जाता है तो इसका मतलब है कि मार्केट bullish होने का संकेत दे रहा है।

ट्रेडिंग वॉल्यूम और डॉलर वॉल्यूम में क्या अंतर होता है?

ट्रेडिंग वॉल्यूम और डॉलर वॉल्यूम में क्या अंतर होता है?
एक निश्चित समय के दौरान खरीदे और बेचे गए शेयर्स की संख्या को “ट्रेडिंग वॉल्यूम” कहते हैं जबकि ट्रेड किए शेयर्स की कुल वैल्यू को “डॉलर वॉल्यूम” कहते हैं।

डॉलर वॉल्यूम को कैलकुलेट करने के लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्राइस से multiply किया जाता है जैसे;

डॉलर वॉल्यूम = ट्रेडिंग वॉल्यूम × प्राइस

उदाहरण: मान लीजिए ट्रेडिंग वॉल्यूम 1000 है और शेयर प्राइस 3 doller है तो डॉलर वॉल्यूम होगा 1000×3 = $3000 डॉलर।

प्रोफेशनल इन्वेस्टर्स डॉलर वॉल्यूम का उपयोग स्टॉक की लिक्विडिटी देखने के लिए करते हैं।

शेयर मार्केट में वॉल्यूम कैसे चेक करें?

किसी भी शेयर कॉ volume हम Nse की वेबसाइट पर जाकर चैक कर सकते है जिस कंपनी या स्टॉक का देखना चाहते हो उसका नाम सर्च करो किसी भी स्टॉक का ट्रैड वॉल्यूम चेक कर सकते है

वॉल्यूम का क्या काम है?

वॉल्यूम का क्या काम है?
शेयर मार्केट में वॉल्यूम का काम है: मार्केट की एक्टिविटी और लिक्विडिटी को मापना।

स्टॉक्स में लिक्विडिटी का मतलब होता है कि उस स्टॉक को कितनी आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है।

स्टॉक को खरीदना और बेचना जितना आसान होता है उस स्टॉक की लिक्विडिटी उतनी ही ज्यादा होती है और उसका वॉल्यूम भी उतना ही ज्यादा होता है।

ज्यादातर जो स्टॉक्स लिक्विड स्टॉक्स होते हैं उनका High Volume होता है।

High volume दिखाता है कि मार्केट में buyers और sellers की संख्या बहुत ज्यादा है।

Volume बनने के पीछे की कहानी

VOLUME बनने के पीछे की कहानी
वॉल्यूम तभी बढ़ता है, जब लोग ट्रेड या तो ज्यादा लेते है , तो ऐसे में इस बात को ध्यान में रखना जरुरी है कि Volume के बढ़ने के दो प्रमुख कारण हो सकते है –

रिटेल इन्वेस्स्टेर का जोर (इंटरेस्ट) – जब किसी स्टॉक का ज्यादा से ज्यादा रिटेल इन्वेस्टर खरीदना चाहते है, या फिर किसी स्टॉक का ज्यादा से ज्यादा रिटेल इन्वेस्टर बेचना चाहते है तो स्टॉक के वॉल्यूम में ये बात स्पस्ट देखने को मिलती है,
बड़ी फाइनेंसियल कम्पनी/इन्वेस्टिंग हाउस का जोर (इंटरेस्ट) – जब किसी स्टॉक को किसी बड़े मार्केट प्लेयर द्वारा ख़रीदा या बेचा जाता है , जैसे FII, या DII, या MUTUAL FUND HOUSE अक्सर बड़ी मात्रा में स्टॉक को खरीदते या बेचते है, जो कि उस स्टॉक केवॉल्यूम को बढ़ा देता है,
इस तरह किसी स्टॉक में जब भी कोई मजबूत (STRONG) VOLUME दिखे तो समझने की कोशिस करने चाहिए, कि किस तरह के लोग इस volume को बढ़ा रहे है, और उसी के अनुसार एक आम निवेशक को वॉल्यूम की दिशा और PRICE में होने वाले उतार चढाव के अनुसार ही मार्केट में अपनी पोजीशन बनानी चाहिए,

वॉल्यूम के द्वारा ट्रेंड को कैसे समझें?

वॉल्यूम के द्वारा ट्रेंड को कैसे समझें?
जब शेयर का प्राइस बढ़ रहा हो और वॉल्यूम कम होता चला जा रहा हो तो इसका मतलब है कि लोगों का उस स्टॉक में इंटरेस्ट खत्म हो रहा है और लोग उसे खरीदना नहीं चाहते।

वॉल्यूम अगर थोड़ा सा कम हुआ है तब कोई दिक्कत नहीं है लेकिन अचानक से बहुत सारा वॉल्यूम कम हो जाए तो इसका मतलब है कि लोग अब उस स्टॉक में इंटरेस्ट नहीं दिखा रहे हैं।

ऐसा होने से अचानक से शेयर प्राइस में भी गिरावट देखने को मिलती है।

स्टॉक मार्केट volume तेजी और मंदी दोनों में बढ़ सकती है –

स्टॉक मार्केट VOLUME तेजी और मंदी दोनों में बढ़ सकती है –
ध्यान दीजिए, कि मार्केट में किसी स्टॉक में मंदी हो या तेजी, दोनों ही कंडीशन में स्टॉक का VOLUME का बढ़ सकता है, अगर मंदी में वॉल्यूम बढ़ता है, इसका मतलब ज्यादा से ज्यादा लोग उस स्टॉक को बेचना चाहते है,

और अगर तेजी (BULLISH MARKET ) में वॉल्यूम बढ़ता है तो इसका मतलब है कि उस स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा लोग खरीदना चाहते है,

Charts के द्वारा वॉल्यूम कैसा दिखता है?

Charts के द्वारा वॉल्यूम कैसा दिखता है?
शेयर मार्केट में वॉल्यूम क्या है, what is volume in share market in hindi

ये ब्रोकर प्लेटफार्म candlestick charts के द्वारा भी वॉल्यूम को दिखाते हैं। Green bar जो होता है वह buying volume दिखाता है और Red bar, Selling volume दिखाता है।

अलग-अलग Time period के अनुसार अलग वॉल्यूम चार्ट्स होते हैं जैसे; hourly volume charts, daily, monthly, 200-day volume charts etc.

ट्रेडिंग वॉल्यूम का मतलब क्या है? What is volume in stock market in hindi

ट्रेडिंग वॉल्यूम का मतलब क्या है? What is volume in stock market in hindi
Share market me volume kya hota hai–अब तक आपने जाना कि खरीदे और बेचे गए शेयर्स की संख्या को शेयर का “वॉल्यूम” कहते हैं। हर बार जब आप शेयर को खरीदते हैं और फिर उसी शेयर को दोबारा बेचते हैं तो प्रत्येक बार आपके खरीदने और बेचने की संख्या को गिना जाता है।

मान लीजिये आपने आज सुबह आपने स्टॉक मार्केट में किसी कंपनी के 10 शेयर्स को खरीदा और कुछ घंटे बाद आपने उन पूरे 10 शेयर्स को बेच दिया तो Total trading volume होगा 20

क्योंकि Total Trading Volume में आपके हर बार खरीदने और बेचने की संख्या को count किया जाता है।

लेकिन अगर शेयर्स केवल आपके डिमैट अकाउंट में पड़े हुए हैं और उन्हें buy या sell नहीं किया जा रहा है तो Volume नहीं बढ़ेगा।

क्योंकि वॉल्यूम केवल तभी बढ़ता है जब buy order या sell order लगाया जाता है।

अगर कोई स्टॉक बहुत ज्यादा खरीदा और बेचा जा रहा है तो उसका वॉल्यूम भी High होगा। इसका मतलब है कि उस स्टॉक में लोगों का इंटरेस्ट बहुत ज्यादा है।

High volume का मतलब है कि शेयर्स को बहुत ज्यादा एक जगह से दूसरी जगह ट्रेड किया जा रहा है।

Relative Volume क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

शेयर का रिलेटिव वॉल्यूम इतना ज्यादा होता है उस stock में volatility ज्यादा होती है और उसके move होने के अधिक चांसेस होते है relative volume करंट वॉल्यूम और normal volume को दोगुना दिखाता है अगर relative volume 1 है तो normal volume से 2 गुना ज्यादा ट्रेड हो रहे शेयर मार्केट मे जिसके कारण मार्केट मे movement आती है ओर मार्केट ऊपर की ओर जाता है

आज हमने इस लेख के जरिए volume के बारे मे जाना volume क्या है ?(what is volume in share market ) technical analysis मे वॉल्यूम क्या होता है( what is volume in technical analysis) अगर आपको हमारी यह जानकारी पसंद आयी हो तो हमे comment करके जरूर बताए अगर आपका कोई भी सवाल हो तो आप हमे कमेन्ट या ईमेल कर सकते है हम आपके सवाल का जवाब देने की कोशिश करगे इसके साथ ही इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ शेयर करना ने भूले धन्यवाद ।

Q.1 क्या NSE और BSE दोनों पर एक जैसा ही वॉल्यूम दिखाता है?

Ans.किसी भी स्टॉक का वॉल्यूम NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) और BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) दोनों पर अलग-अलग होता है और यही कारण है कि उसी same स्टॉक का प्राइस एनएसई (NSE) और बीएसई (BSE) दोनों पर हमें अलग-अलग दिखाई देता है।

Q.2 Volume का फार्मूला

Ans. Volume = Total Number of Shares

Q.3 Volume का अर्थ

Ans. वॉल्यूम का का हिंदी अर्थ मात्रा यानी कुल संख्या होती है स्टॉक मार्केट के संबंध में किसी भी शेयर में होने वाले बिक्री और खरीदी की मात्रा या कुल संख्या को होली में कहा जाता है वॉल्यू


Leave a Comment